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जनज्वार: फर्जी मुठभेड़ के 14 बहादुरों को आजीवन कारावास#links#links#links#links#links#links#links#links#links

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कामयाब रहा मायावती का मूल मंत्र कापता रहा लोक हाफता रहा तन्त्र

(विजय विनीत ) सोनभद्र,10 फरवरी । मुख्यमंत्री मायावती के दौरे को लेकर गु रूवार को जिले में कर्फ्यू जैसा माहौल रहा। सड़क पर मायावती के काफिले कें अलावा कोई नजर नही आ रहा था। कही मुख्यमंत्री नाराज न हो जाय इसे लेकर पुलिस और प्रशासनिक अमला हापता नजर आया। अ म्बेडकर गांव बेलाव, जिला अस्पताल, कोतवाली व तहसील परिषर देखने के बाद व वापस चली गयी। इस दौरान पुलिस के लोग कही सड़क पर आयी गायों को भगाते रहे तो कही कुत्तों को भगाते नजर आये। आम आदमी को इतनी दूर खदेड़ दिया गया था कि कही कोई उन्हें जो र से बोल कर भी अ पनी तरफ मुखातिब न कर सकें। उनके दौरे को लेकर पुरे जिले में पिछले दस दिनो ंसे अफरा-तफरी का माहौल कायम रहा। पॉंच साल पूर्व इसी जिले में एक अम्बेडकर गांव के निरीक्षण के समय जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी समेत क ई अधिकारियों को मायावती ने निलम्बित कर दिया था। इस बार न उन्होंने सभा की न तो पत्रकारों से वार्ता किया। नक्सल प्रभावित सोनभद्र में दो सौ तिरपन अम्बेडकर गांव है। पहली बार 1995-96 में मुख्यमंत्री बनने पर मायावती ने सोनभद्र के लगभग पांच दर्जन गांवो को अम्बेड कर गांव घोंषित किया था। इसक...

रन टोला मुठभेड़ के बहाने खुली सोनभद्र में हुयी मुठभेड़ो की हकीकत

फर्जी मुठभेड़ो में मारे गए पचास से अधिक आदिवासी व् दलित हत्यारे पुलिस कर्मी पदकों से नवाजे गए विजय विनीत (सोनभद्र ) एक वर्ष पूर्व देश में जब रूचिका छेड़छाड़ मामले में हरि याणा के पू र्व डीजीपी एस.के.राठौर चर्चाओं में थे व उनके द्वारा किये गये घिनौने कुकृत्य की देश भर में भ र्त्सना की जा रही थी, उसी समय उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में छः वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक को र्ट ने फर्जी करार देते हुए उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया। इस फैसले से पूरे देश में एक बार फिर पुलिस की वर्दी शर्मसार व खून के छीटें से लाल हुई तो वहीं न्यायालयीय व्यवस्था के प्रति भी लोगों का विश्वास बढ़ा। इस से न्याय प्रक्रिया व जनवादी ताकतों की जीत हुई। सोनभद्र की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला सिर्फ रनटोला मुठभेड़ ही नहीं बल्कि तमाम मुठभेड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वैसे भी उत्तर प्रदेश पुलिस मानवाधिका र उल्लंघन के मामले में देश में सबसे प्रथम पायदान पर है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हु ई य ह मुठभेड़ कोई पहली घटना नहीं थी। जिस ...

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही विजय विनीत आजादी के लिए मर मिटनें वालों ने सपने तो बहुत देखें होगें लेकिन उनमे दो महत्व पूर्ण थे । एक था अंग्रेजों को भगाकर स्वतंत्रता हासिल करना और दूसरा भारत से राज सत्ता का खात्मा व लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत देश में सत्ता का सञ्चालन । अकल्पनीय कष्टों व तमाम कुछ खोने के बाद देश आजाद तो हुआ लेकिन पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक व्यवस्था देश में लागू नही हो सकी है । [Image]भारत में आजादी के पूर्व ५६५ छोटी बड़ी रियासतें थीं । इनमे कुछ काफी बड़े राज घराने थे जो सदियों से कायम थे तो कुछ ऐसी भी रियासतें थी जिन्हें दिल्ली पर शासन करने वाले शासको ( अंग्रेज व मुग़ल शासकों ) ने बना दिया था । आजादी के बाद सभी रियासतों का विलय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत भारतीय गणराज्यों में हो गया । कुछ ने अगर भारतीय गणराज्य में शामिल होने से इनकार किया तो सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उन्हें मजबूर किया और सभी रियासतें टूट गयीं । [Image]26 जनवरी १९५२ से भारतीय संविधान के तहत देश का सञ्चालन शुरू हुआ । पहला लोक सभा चुनाव सन १९५२ में हुआ तो तमाम रियासतों के राजा या ...

वन कर्मियों ने दलितों की पचास से अधिक झोपड़िया की आग के हवाले

विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं ...