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जातिगत संघर्ष मंे माओंवादियों ने अपने कमाण्डर समेत दो को गोली से उड़ाया।

माओवादी संगठन भी जातिवाद और क्षेत्रवाद को लेकर कड़वाहट बढ़ी
विजय विनीत

सोनभद्र। 02 जुलाई उŸार प्रदेश के माओवाद से प्रभावित सोनभद्र की सीमा से सटे बिहार राज्य में माआंेवादियों ने अपने ही कमाण्डर साथी समेत दो को गोली से उड़ा दिया। मारे गये दोनों माओवादी यादव जाति के थे और उन्हे खरवार बिरादरी के माओवादियों ने मारा। इस घटना को लेकर बिहार व झारखंड के भाकपा माओवादी संगठनों के नेता सकते मंे हैं। मारा गया कमाण्डर बिहार में पचास हजार का ईनामी था। उŸार प्रदश के हिनउत विस्फोट कांड में पुलिस को उसकी तलाश थी। कामेश्वर बैठा की गिरफ्तारी के बाद उसे उŸार प्रदेश का कमाण्डर बनाया गया था। माओवादी संगठन में क्षेत्रवाद और जातिवाद की लड़ाई शुरू होने से प्रशासनिक हलकों में प्रसन्नता देखी जा रही है।
सोनभद्र की सीमा से सटे बिहार के रोहतास जनपद के नौहट्टा थाना में परछा गाँव है। यह गाँव पहाड़ो और जंगलो के बीच स्थित है। इसी से सटे जदुनाथपुर, नावाडीह, बेलदुरिया, करियवाडीह व कौवाखोह के जंगलो में माओवादियों का ठिकाना है। उŸार प्रदेश, बिहार व झारखंड के माओवादियों की कई टीमें इन्ही गाँवों में रहती हैं। परछा गाँव के पास गुरूवार की रात दुर्गावती औरंगाबाद एरिया कमेटी का कमाण्डर विरेन्दर यादव उर्फ राणा अपनी टीम के साथ मौजूद था। उसकी टीम में उसके अलावा यादव बिरादरी का विषुनदेव यादव भी था। इसके अलावा उसकी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी में सभी माओवादी खरवार व अन्य छोटी विरादरी के थे। रात आठ बजे के करीब खरवार जाति के माओवादी किसी बात पर अपने कमाण्डर विरेन्दर यादव उर्फ राणा का विरोध शुरू कर दिये। इसे देख विषुनदेव यादव कमाण्डर का पक्ष लेने लगा। इस पर खरवार बिरादरी के माओवादी उग्र हो गये और अपने कमाण्डर व विषुनदेव यादव को गोली से उड़ा दिया। सूत्रों का कहना है कि रोहतास, भभुआ, पलामू जिलों में यादव बिरादरी के लोग छोटी जातियों का व्यापक पैमाने पर उत्पीड़न कर रहे हैं। इसकी शिकायत जब गाँव के लोग माओवादी कमाण्डर राणा से करते थे तो व टाल जाता था। जबकि खरवार व अन्य छोटी बिरादरी के माओंवादी इन मुद्दो पर जन अदालत लगाकर लोगों को दंडित करने के पक्ष में थे। इसे लेकर खरवार बिरादरी के माओवादियों को शक था कि राणा यादव होने की वजह अपनी बिरादरी के दंबगो के खिलाफ कार्यवाही नहीं करना चाहता था। सूत्रो का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब माओवादियों ने बिहार में अपने ही कमाण्डर को गोली से उड़ाया हो। बिहार व झारखंड में कई ऐसी टीमें है जिनके कमांडर यादव जाति के है। माओवादी संगठन में इस तरह के जातिगत संघर्ष को देखकर संगठन के तमाम बड़े नेता सकते में है। बिहार व झारखंड के कुछ माओवादी इस बात पर भी खासे नाराज है कि उनकी कमान उŸार प्रदेश के कुछ गिने चुने माओवादियों के हाथों सौंप दी गयी है। उŸार प्रदेश में जहाँ वर्तमान में माओवाद पूरी तरह उखड़ चुका है। वहाँ से आकर तीन लोग बिहार व झारखंड की टीम के कमाण्डर बने हुए है। लगभग एक वर्ष पूर्व सोनभद्र में साथियों ने अपने एक एरिया कमाण्डर रामवृक्ष कोल गोली से उड़ा दिया था। एक माह पूर्व सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र के एक माओवादी ने जब घर जाने की इच्छा जताई थी तो परछा गाँव के ही पास उसे माओवादियों ने लाठियों से पीटकर मार डाला था। माओवादी संगठन में इस तरह बढ़ रहे संघर्श से प्रशासनिक अमले में प्रसन्नता देखी जा रही है। उŸार प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि जो काम हमे करना चाहिए था वह उनकी टीम द्वारा ही किया जा रहा है। ऐसे में हमारा काम आसान हो गया है।
बिहार में लम्बे समय से यादवों व खरवारों के बीच जातिगत खूनी संघर्ष होते आये हैं। आज से डेढ़ दशक पूर्व कैमूर की पहाडि़यों में खरवारों और यादवों के कई डाकू गिरोह थे। यह गिरोह एक दूसरे के जानी दुश्मन थे। खरवारों का नेतृत्व हरि प्रसाद सिंह उर्फ घमड़ी खरवार करते थे जो बाद में उŸार प्रदेश से विधायक चुने गये थे। दूसरा चुनाव हारने के बाद यादव जाति के लोगों ने उनकी हत्या कर दी। यादवों का नेतृत्व रामवचन यादव करते थे जो बिहार से विधायक चुने गये। वर्तमान में डाकू गिरोह की जगह यादवों ने खरवार माओवादियों के विरूद्ध कैमूर शांति सेना का गठन कर रखा है। आये दिन इस सेना और माओवादियों के बीच टकराव होता रहता है। पिछले एक साल के भीतर कई यादव व खरवार बर्चस्व की जंग में मारे जा चुक हैं।

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