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ज्योतिर्मय डे की याद में सोनभद्र में लगाये गये 10000 पौधे



कई जनसंगठनों ने निकाला मौन जुलूस
-विजय विनीत
सोनभद्र 4 जुलाई मुंबई में 11 जून को प्रख्यात पत्रकार जे डे की हत्या के विरोध में उप्र के सोनभद्र में सैकड़ों लोगों ने जुलूस निकाल कर हत्यारों को फांसी देने की मांग की। इस अवसर पर जनपद में जे डे की याद मे 10000 फलदार पौधे लगाये गये। जनसंगठनों की तरफ से प्रधानमंत्री को संबोधित 8 सूत्रीय मांगपत्र में पत्रकारो की सुरक्षा के लिये देश में प्रभावी कानून बनाने की मांग की गयी। इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि एक पत्रकार की हत्या का मुद्दा जो कि सीधे तौर पर शहरी बुद्वीजीवी वर्ग से जुड़ा हुआ था लेकिन इसकी पहल यहां के वनक्षेत्र रहने वाले आदिवासी एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के संगठन कैमूर क्षेत्र महिला मज़दूर किसान संघर्ष समिति द्वारा की गई। यह संगठन राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय वन-जन श्रमजीवी मंच से जुड़ा हुआ है । इसके अलावा इस कार्यक्रम में मानवाधिकार कानूनी सलाह केन्द्र, न्यू ट्रेड यूनियन इनिशिएटिव, प्रेस क्लब सोनभद्र भी शामिल रहे।
सोनभद्र जिला मुख्यालय स्थित हाईडल मैदान से दोपहर सैकड़ों की संख्या में आदिवासी जिनमें अधिकांश महिलायें थीं और बड़ी संख्या में जनसंगठनों के कार्यकर्ता, पत्रकार व अधिवक्तागण ने मिलकर मौन जुलूस निकाला। जुलूस में शामिल लोगों ने हाथों में तुम तोपों के मुंह खोलो-हम क़लम से सच को उगलेंगे, बिकाऊ पत्रकारिता को खत्म करो, निडर पत्रकारों की सुरक्षा करो, ज्योतिर्मय डे के हत्यारों को फांसी दो, सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं-मेरी कोशिश है के ये सूरत बदलनी चाहिये समेत विभिन्न नारे लिखीं तख्तियां ले रखीं थीं। जुलूस शान्तिपूर्ण ढंग से नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सदर तहसील परिसर पहुंचा। तहसील परिसर मेें जुलूस सभा की शक्ल में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए पत्रकार रजनीश ने कहा कि जे डे की हत्या सिर्फ एक पत्रकार की हत्या नहीं बल्कि हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या है। इस हत्या के पीछे माफिया और राजनैतिक गठजोड़ शामिल है। जे डे देश के लिये नासूर बन चुके इस गठजोड़ को तोड़ने और बेनकाब करने के लिये लगातार अपनी कलम चला रहे थे। सरकार को उनकी हत्या की निष्पक्ष जांच कराकर सभी पहलुओं को देश के सामने लाना चाहिये। उन्होंने कहा कि पिछले साल सोनभद्र में भी गरीबों की आवाज़ उठाने वाले कमलेश नामक पत्रकार की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले की लीपा पोती कर डाली। इसी तरह देश में आदिवासियों वन वासियांें, गरीबों व आम आदमी की बात करने वाले पत्रकारों का उत्पीड़न आम बात हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता रोमा ने कहा कि देश में गरीबों मज़लूमों की आवाज़ दबाने की कोशिश हर तरफ की जा रही है। जे डे आम आदमी की आवाज़ थे। इसी लिये उनकी आवाज़ बन्द कर दी गयी। पत्रकार आम आदमी की आवाज़ होता है, ऐसे में समाज के सभी लोगों को उनकी सुरक्षा के लिये आगे आना पड़ेगा। सभी लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में गरीबों की आवाज़ बाहर नहीं आ पायेगी। सभा को प्रेस क्लब सोनभद्र के अध्यक्ष विजय शंकर चतुर्वेदी, अधिवक्ता अशोक तिवारी, रमाशंकर, राजकुमारी, सुकालो, शान्ता भट्टाचार्या समेत अन्य कई लोगों ने संबोधित किया।
इसके पश्चात तहसील परिसर में सौ फलदार वृक्षों को खेती करते वक्त गाया जाने वाला अपना पारंपरिक गीत गाते हुऐ वनवासी महिलाओं द्वारा जे डे की याद में लगाया गया। इसी के साथ जनपद के कई गांवों में एक माह तक दस हजार पौधे लगाने की शुरुआत तहसील प्रांगण के पार्क से की गयी।

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