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कामयाब रहा मायावती का मूल मंत्र कापता रहा लोक हाफता रहा तन्त्र

(विजय विनीत )
सोनभद्र,10 फरवरी। मुख्यमंत्री मायावती के दौरे को लेकर गुरूवार को जिले में कर्फ्यू जैसा माहौल रहा। सड़क पर मायावती के काफिले कें अलावा कोई नजर नही आ रहा था। कही मुख्यमंत्री नाराज न हो जाय इसे लेकर पुलिस और प्रशासनिक अमला हापता नजर आया। अम्बेडकर गांव बेलाव, जिला अस्पताल, कोतवाली व तहसील परिषर देखने के बाद व वापस चली गयी। इस दौरान पुलिस के लोग कही सड़क पर आयी गायों को भगाते रहे तो कही कुत्तों को भगाते नजर आये। आम आदमी को इतनी दूर खदेड़ दिया गया था कि कही कोई उन्हें जो से बोल कर भी अपनी तरफ मुखातिब न कर सकें। उनके दौरे को लेकर पुरे जिले में पिछले दस दिनो ंसे अफरा-तफरी का माहौल कायम रहा। पॉंच साल पूर्व इसी जिले में एक अम्बेडकर गांव के निरीक्षण के समय जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी समेत क अधिकारियों को मायावती ने निलम्बित कर दिया था। इस बार न उन्होंने सभा की न तो पत्रकारों से वार्ता किया।
नक्सल प्रभावित सोनभद्र में दो सौ तिरपन अम्बेडकर गांव है। पहली बार 1995-96 में मुख्यमंत्री बनने पर मायावती ने सोनभद्र के लगभग पांच दर्जन गांवो को अम्बेडकर गांव घोंषित किया था। इसके बाद वह जब-जब सत्ता में आयी अम्बेडकर गांवो की संख्या बढ़ती रही। पिछले दस दिनों से प्रशासनिक अमला इस बात को लंेकर काफी परेशान था कि वह पता नहीं किस गांव को देखेगी। सात फरवरी को 1995-96 में अम्बेडकर गांव घोषित मसीपठान गांव में आने की पुष्टि हुई। इस पर सारा प्रशासनिक हमला जब मसीपठान गांव पहुंचा तो वहा कोई भी कार्य पूरा न पाकर अधिकारियों के पांव के नीचे से जमीन खिसक गयी। आनन-फानन में वहा दो सौ ठेकेदार पांच सौ सफाईकर्मी दर्जनों राजगीर काम पर लगा दिये गये। अमरनाथ तिवारी नामक किसान के खेंत में खड़ी फसल को रौद कर हेलीपैड तैयार कर दिया गया कई शौचालय रातो रात बना दिये गये। फिर भी कई आवास व अन्य कार्य पूरे नही हो पा रहे थे। अचान अगले दिन दोपहर बाद वहां का कार्यक्रम बदल दिया गया। और वहा से तीन किलोमीटर पुरब अम्बेडकर गांव बेलाव में कार्यक्रम की घोषणा कर दी गयी। वहां भी कमोवेश वहीं स्थिति पायी गयी। ग्रामीण इस बात पर हैरानी जता रहे थें कि चौदह साल पूर्व चयनीत इन गांवो की तस्वीर बदलने के लिए अचानक इतना धन कहा से आ गया।
रातो रात गांव को चमका दिया गया। गांव को देखकर लो शहर की रौनक भूल गए। जिला मुख्यालय पर भी जिस मलीन बस्ती में महीने में कभी कभार झाडू लगता था वहां स्वयं उच्चाधिकारी खड़े होकर झाडू लगवाते रहे। मायावती के दौरे को लेकर जनपद के लगभग डेढ दर्जन अम्बेडकर गांवो की तस्वीर ही सप्ताह भर के अन्दर बदल गयी।
गुरूवार को उनका हेलीकॉप्टर सबसे पहले अम्बेडकर गांव बेलाव में उतरा। सुरक्षा का इतना व्यापक बन्दोबस्त था कि आम आदमी तो दूर कई ऐसे लोग उनसे दो सौ मीटर दूर रहें जो पार्टी में अपने को दमदार बताते रहें। अम्बेडकर गांव की गलियों में घूमने के बाद वह उच्चाधिकारियों से कुछ मिनट तक बात की इसके बाद पुलिस लाइन के लिए चली गयी। पुलिस लाइन से सीधे जिला अस्पताल फिर कोतवाली होेते हुए तहसील पहुंची। समूचे नगर की सभी सड़को पर बैरीयर लगा दिये गये थे। मोटर गाड़ी तो दूर लोंग उस पर पैदल भी नहीं जा पा रहे थे। नगर की सड़को पर मुख्यमत्रंी के काफिले के सिवा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। कोई पुलिस वाला सड़क से गाय भगा रहा था तो कोई कुत्ते के पीछे पड़ा हुआ था। नगर की जिस सड़क से मायावती को गुजरना था हर घर के सामने पुलिस व पी0ए0सी के लोग तैनात थें। लोग अपने घरो से बाहर भी नही निकल पा रहे थे।
मायावती के दौरे को भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने इसे सत्ता की राजनीति बताया भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने कहा कि चा साल तक दाम चाहिए। एक साल फिर काम चाहिए। यह उनका अधिकारियों के शोषण का नया तरीका है। वहीं हेलीपैड तक पहुंचने में कामयाब न होने पर भाजपा के कई युवकों ने नारा लगाया की मायावती वापस जाओं या छात्र शक्ति की जांच कराओं। सोनभद्र के निरीक्षण में उन्हें क्या खामिया मिली इसका खुलासा फिलहाल समाचार लिखे जाने तक नहीं हो पाया था। लेकिन उनके आने से लेकर जाने तक लोक कापता रहा और तन्त्र हाफता रहा। सड़कों पसरा सन्नाटा इस बात की सवाल खड़ा कर रहा था कि यह कैसा लोक तन्त्र जिसमें लोक मुख्यमंत्री तक अपनी बात न कह सकें। आखिर लोगों के घरों के पास किस मकसद से पुलिस का पहरा रहा और लोगों को घरों से नहीं निकलने दिया गया।

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