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जनवरी 25, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हत्यारे निकले पत्रकार

जनादेश डाट इन/विजय ༯div> सोनभद्र। अभी सीबीआई जांच में सोनभद्र के कुछ पत्रकारों पर कोयले चोरी में संलिप्तता की कालिख साफ नहीं हो पायी थी कि फर्जी रनटोला कांड में पत्रकारों की भूमिका ने मीडिया के दामन को भी रक्तरंजित कर दिया है। देश भर से निर्दोषों के कत्ल पर पत्रकारों की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं।इण्डियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विक्रमराव ने सम्पूर्ण प्रकरण को घृणित बताते हुए दोषी व्यक्तियों की जांच की मांग की है, वहीं पीयूएचआर के सदस्य विजय विनीत ने भारत सरकार के गृह मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजकर आवश्यक कार्यवाही की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस प्रकरण पर जनहित की तैयारी से मीडियाकर्मियों में खलबली मच गयी है।वर्ष 2003 में सोनभद्र के रनटोला के जंगलों में इनकाउन्टर के लिए ले जाये गये दो निर्दोष युवकों को गोली मारने से पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के सत्यनारायणा ने स्थानीय पत्रकारों को बुलवाया और इस खूनी खेल के नैतिक समर्थन में पत्रकारों से सहमति मांगी। काजू की बर्फी और काजू की नमकीन खाकर पत्रकारों ने सहमति तो दी ही, इस खे...