विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं गये तो अंजाम बुरा होगा। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग इस पर कोई तवज्जों नही दिये। आज दोपहर कई गाड़ियों में वन कर्मी आयें। वह लोग झोपड़ियों में मौजूद तमाम सामाने उठाकर अपनी गाड़ियों में रख लिये। इसके बाद झोपड़ियों में आग लगा दी। विरोध करने पर कुछ लोगों को लाठियों से पीटा जिससे पतिराज पुत्र बंटू का सर फट गया। इस बारे मंें जिलाधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करने पर बताया गया कि साहब क्षेत्र में हैं। इस तरह की कोई घटना नहंी हुई है। दो दिन पूर्व वन कर्मी वहां गये थे, आज कोई नहीं गया। प्रभागीय वनाधिकारी रामनगर से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह की किसी भी घटना की जानकारी नहीं, मैं लखनउ में हूंॅ। चकिया विधायक जितेन्द्र कुमार ने भी ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया। वन कर्मियों द्वारा झोपड़ियों में आग लगाये जाने से अगल-बगल के गांवों में निवास करने वाले दलितों में वन कर्मियों के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अभी एक माह पूर्व नौगढ़ रेंजर द्वारा सूखी लकड़ी ले जा रहे आदिवासियों की पिटाई को लेकर अगल-बगल के तमाम लोगों ने नौगढ़ रेंज कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोगों ने रेंजर की गाड़ी भी तोड़ दी थी। नौगढ़ वन रेंज के कर्मियों द्वारा आये दिन कहीं न कहंीं इस तरह लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। सन् 2005 में इसी तरह मझगांई वन रेंज कार्यालय द्वारा सैकड़ों झोपड़िया व मकान जमींदोज कर दिये गये थे। उसके प्रतिशोध स्वरूप माओवादियों ने विस्फोट कर मझगाई वन रेेंज कार्यालय उड़ा दिया था। जिसमें तीन वन कर्मियों की मौत हो गयी थी। इस घटना के ठीक एक दिन बाद माओवादियों ने हिनौत घाट पर पीएसी ट्रक को विस्फोट के जरिये उड़ा दिया था। क्षेत्र मे कार्यरत सामाजिक संगठनों के लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही की जगह प्रशासन को संयम और सूझबूझ से मामलों का हल निकालना चाहिए। इस तरह की घटनाएं संवेदनशील जिलों में आग में घी का काम करती है। नौगढ़ रेंजर जी.आर.सिदद्की ने बताया कि आज हम अपने वन कर्मियों के साथ सुखदेवपुर गये थे। वहां चार दिनों के भीतर सोनभद्र के कई गांवों केें लोग मिलकर ढाई सौ हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा कर लिये हैं। पिपराडीह में सुखदेवपुर नाम का नया गॉंव बसा दिये हैं।हम लोग वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गये थे। साथ में सौ से अधिक गहिला गॉंव के ग्रामीण भी थे। अतिक्रमण हटाने के दौरान कब्जा धारकों ने स्वयं अपनी झोपड़िया फूंक दी। टेवनवांनार जंगल में भी व्यापक पैमाने पर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी है वन भूमि की रक्षा करना, अगर यह गैर कानूनी है तो हमारे दफ्तरों में ताला लगा दिया जाय और वन कर्मियों को छुट्टी दे दी जाय। वन कर्मियों ने दलितों की पचास से अधिक झोपड़िया की आग के हवाले विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं गये तो अंजाम बुरा होगा। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग इस पर कोई तवज्जों नही दिये। आज दोपहर कई गाड़ियों में वन कर्मी आयें। वह लोग झोपड़ियों में मौजूद तमाम सामाने उठाकर अपनी गाड़ियों में रख लिये। इसके बाद झोपड़ियों में आग लगा दी। विरोध करने पर कुछ लोगों को लाठियों से पीटा जिससे पतिराज पुत्र बंटू का सर फट गया। इस बारे मंें जिलाधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करने पर बताया गया कि साहब क्षेत्र में हैं। इस तरह की कोई घटना नहंी हुई है। दो दिन पूर्व वन कर्मी वहां गये थे, आज कोई नहीं गया। प्रभागीय वनाधिकारी रामनगर से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह की किसी भी घटना की जानकारी नहीं, मैं लखनउ में हूंॅ। चकिया विधायक जितेन्द्र कुमार ने भी ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया। वन कर्मियों द्वारा झोपड़ियों में आग लगाये जाने से अगल-बगल के गांवों में निवास करने वाले दलितों में वन कर्मियों के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अभी एक माह पूर्व नौगढ़ रेंजर द्वारा सूखी लकड़ी ले जा रहे आदिवासियों की पिटाई को लेकर अगल-बगल के तमाम लोगों ने नौगढ़ रेंज कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोगों ने रेंजर की गाड़ी भी तोड़ दी थी। नौगढ़ वन रेंज के कर्मियों द्वारा आये दिन कहीं न कहंीं इस तरह लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। सन् 2005 में इसी तरह मझगांई वन रेंज कार्यालय द्वारा सैकड़ों झोपड़िया व मकान जमींदोज कर दिये गये थे। उसके प्रतिशोध स्वरूप माओवादियों ने विस्फोट कर मझगाई वन रेेंज कार्यालय उड़ा दिया था। जिसमें तीन वन कर्मियों की मौत हो गयी थी। इस घटना के ठीक एक दिन बाद माओवादियों ने हिनौत घाट पर पीएसी ट्रक को विस्फोट के जरिये उड़ा दिया था। क्षेत्र मे कार्यरत सामाजिक संगठनों के लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही की जगह प्रशासन को संयम और सूझबूझ से मामलों का हल निकालना चाहिए। इस तरह की घटनाएं संवेदनशील जिलों में आग में घी का काम करती है। नौगढ़ रेंजर जी.आर.सिदद्की ने बताया कि आज हम अपने वन कर्मियों के साथ सुखदेवपुर गये थे। वहां चार दिनों के भीतर सोनभद्र के कई गांवों केें लोग मिलकर ढाई सौ हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा कर लिये हैं। पिपराडीह में सुखदेवपुर नाम का नया गॉंव बसा दिये हैं।हम लोग वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गये थे। साथ में सौ से अधिक गहिला गॉंव के ग्रामीण भी थे। अतिक्रमण हटाने के दौरान कब्जा धारकों ने स्वयं अपनी झोपड़िया फूंक दी। टेवनवांनार जंगल में भी व्यापक पैमाने पर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी है वन भूमि की रक्षा करना, अगर यह गैर कानूनी है तो हमारे दफ्तरों में ताला लगा दिया जाय और वन कर्मियों को छुट्टी दे दी जाय। वन कर्मियों ने दलितों की पचास से अधिक झोपड़िया की आग के हवाले विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं गये तो अंजाम बुरा होगा। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग इस पर कोई तवज्जों नही दिये। आज दोपहर कई गाड़ियों में वन कर्मी आयें। वह लोग झोपड़ियों में मौजूद तमाम सामाने उठाकर अपनी गाड़ियों में रख लिये। इसके बाद झोपड़ियों में आग लगा दी। विरोध करने पर कुछ लोगों को लाठियों से पीटा जिससे पतिराज पुत्र बंटू का सर फट गया। इस बारे मंें जिलाधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करने पर बताया गया कि साहब क्षेत्र में हैं। इस तरह की कोई घटना नहंी हुई है। दो दिन पूर्व वन कर्मी वहां गये थे, आज कोई नहीं गया। प्रभागीय वनाधिकारी रामनगर से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह की किसी भी घटना की जानकारी नहीं, मैं लखनउ में हूंॅ। चकिया विधायक जितेन्द्र कुमार ने भी ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया। वन कर्मियों द्वारा झोपड़ियों में आग लगाये जाने से अगल-बगल के गांवों में निवास करने वाले दलितों में वन कर्मियों के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अभी एक माह पूर्व नौगढ़ रेंजर द्वारा सूखी लकड़ी ले जा रहे आदिवासियों की पिटाई को लेकर अगल-बगल के तमाम लोगों ने नौगढ़ रेंज कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोगों ने रेंजर की गाड़ी भी तोड़ दी थी। नौगढ़ वन रेंज के कर्मियों द्वारा आये दिन कहीं न कहंीं इस तरह लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। सन् 2005 में इसी तरह मझगांई वन रेंज कार्यालय द्वारा सैकड़ों झोपड़िया व मकान जमींदोज कर दिये गये थे। उसके प्रतिशोध स्वरूप माओवादियों ने विस्फोट कर मझगाई वन रेेंज कार्यालय उड़ा दिया था। जिसमें तीन वन कर्मियों की मौत हो गयी थी। इस घटना के ठीक एक दिन बाद माओवादियों ने हिनौत घाट पर पीएसी ट्रक को विस्फोट के जरिये उड़ा दिया था। क्षेत्र मे कार्यरत सामाजिक संगठनों के लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही की जगह प्रशासन को संयम और सूझबूझ से मामलों का हल निकालना चाहिए। इस तरह की घटनाएं संवेदनशील जिलों में आग में घी का काम करती है। नौगढ़ रेंजर जी.आर.सिदद्की ने बताया कि आज हम अपने वन कर्मियों के साथ सुखदेवपुर गये थे। वहां चार दिनों के भीतर सोनभद्र के कई गांवों केें लोग मिलकर ढाई सौ हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा कर लिये हैं। पिपराडीह में सुखदेवपुर नाम का नया गॉंव बसा दिये हैं।हम लोग वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गये थे। साथ में सौ से अधिक गहिला गॉंव के ग्रामीण भी थे। अतिक्रमण हटाने के दौरान कब्जा धारकों ने स्वयं अपनी झोपड़िया फूंक दी। टेवनवांनार जंगल में भी व्यापक पैमाने पर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी है वन भूमि की रक्षा करना, अगर यह गैर कानूनी है तो हमारे दफ्तरों में ताला लगा दिया जाय और वन कर्मियों को छुट्टी दे दी जाय। वन कर्मियों ने दलितों की पचास से अधिक झोपड़िया की आग के हवाले विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं गये तो अंजाम बुरा होगा। ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग इस पर कोई तवज्जों नही दिये। आज दोपहर कई गाड़ियों में वन कर्मी आयें। वह लोग झोपड़ियों में मौजूद तमाम सामाने उठाकर अपनी गाड़ियों में रख लिये। इसके बाद झोपड़ियों में आग लगा दी। विरोध करने पर कुछ लोगों को लाठियों से पीटा जिससे पतिराज पुत्र बंटू का सर फट गया। इस बारे मंें जिलाधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करने पर बताया गया कि साहब क्षेत्र में हैं। इस तरह की कोई घटना नहंी हुई है। दो दिन पूर्व वन कर्मी वहां गये थे, आज कोई नहीं गया। प्रभागीय वनाधिकारी रामनगर से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस तरह की किसी भी घटना की जानकारी नहीं, मैं लखनउ में हूंॅ। चकिया विधायक जितेन्द्र कुमार ने भी ऐसी किसी भी घटना से इन्कार किया। वन कर्मियों द्वारा झोपड़ियों में आग लगाये जाने से अगल-बगल के गांवों में निवास करने वाले दलितों में वन कर्मियों के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। अभी एक माह पूर्व नौगढ़ रेंजर द्वारा सूखी लकड़ी ले जा रहे आदिवासियों की पिटाई को लेकर अगल-बगल के तमाम लोगों ने नौगढ़ रेंज कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान लोगों ने रेंजर की गाड़ी भी तोड़ दी थी। नौगढ़ वन रेंज के कर्मियों द्वारा आये दिन कहीं न कहंीं इस तरह लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। सन् 2005 में इसी तरह मझगांई वन रेंज कार्यालय द्वारा सैकड़ों झोपड़िया व मकान जमींदोज कर दिये गये थे। उसके प्रतिशोध स्वरूप माओवादियों ने विस्फोट कर मझगाई वन रेेंज कार्यालय उड़ा दिया था। जिसमें तीन वन कर्मियों की मौत हो गयी थी। इस घटना के ठीक एक दिन बाद माओवादियों ने हिनौत घाट पर पीएसी ट्रक को विस्फोट के जरिये उड़ा दिया था। क्षेत्र मे कार्यरत सामाजिक संगठनों के लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही की जगह प्रशासन को संयम और सूझबूझ से मामलों का हल निकालना चाहिए। इस तरह की घटनाएं संवेदनशील जिलों में आग में घी का काम करती है। नौगढ़ रेंजर जी.आर.सिदद्की ने बताया कि आज हम अपने वन कर्मियों के साथ सुखदेवपुर गये थे। वहां चार दिनों के भीतर सोनभद्र के कई गांवों केें लोग मिलकर ढाई सौ हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा कर लिये हैं। पिपराडीह में सुखदेवपुर नाम का नया गॉंव बसा दिये हैं।हम लोग वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गये थे। साथ में सौ से अधिक गहिला गॉंव के ग्रामीण भी थे। अतिक्रमण हटाने के दौरान कब्जा धारकों ने स्वयं अपनी झोपड़िया फूंक दी। टेवनवांनार जंगल में भी व्यापक पैमाने पर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं। हमारी जिम्मेदारी है वन भूमि की रक्षा करना, अगर यह गैर कानूनी है तो हमारे दफ्तरों में ताला लगा दिया जाय और वन कर्मियों को छुट्टी दे दी जाय।
फर्जी मुठभेड़ो में मारे गए पचास से अधिक आदिवासी व् दलित हत्यारे पुलिस कर्मी पदकों से नवाजे गए विजय विनीत (सोनभद्र ) एक वर्ष पूर्व देश में जब रूचिका छेड़छाड़ मामले में हरि याणा के पू र्व डीजीपी एस.के.राठौर चर्चाओं में थे व उनके द्वारा किये गये घिनौने कुकृत्य की देश भर में भ र्त्सना की जा रही थी, उसी समय उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में छः वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक को र्ट ने फर्जी करार देते हुए उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया। इस फैसले से पूरे देश में एक बार फिर पुलिस की वर्दी शर्मसार व खून के छीटें से लाल हुई तो वहीं न्यायालयीय व्यवस्था के प्रति भी लोगों का विश्वास बढ़ा। इस से न्याय प्रक्रिया व जनवादी ताकतों की जीत हुई। सोनभद्र की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला सिर्फ रनटोला मुठभेड़ ही नहीं बल्कि तमाम मुठभेड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वैसे भी उत्तर प्रदेश पुलिस मानवाधिका र उल्लंघन के मामले में देश में सबसे प्रथम पायदान पर है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हु ई य ह मुठभेड़ कोई पहली घटना नहीं थी। जिस ...
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