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रन टोला मुठभेड़ के बहाने खुली सोनभद्र में हुयी मुठभेड़ो की हकीकत

फर्जी मुठभेड़ो में मारे गए पचास से अधिक आदिवासी व् दलित हत्यारे पुलिस कर्मी पदकों से नवाजे गए विजय विनीत (सोनभद्र ) एक वर्ष पूर्व देश में जब रूचिका छेड़छाड़ मामले में हरि याणा के पू र्व डीजीपी एस.के.राठौर चर्चाओं में थे व उनके द्वारा किये गये घिनौने कुकृत्य की देश भर में भ र्त्सना की जा रही थी, उसी समय उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में छः वर्ष पूर्व हुई मुठभेड़ को स्थानीय फास्ट ट्रैक को र्ट ने फर्जी करार देते हुए उसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने का ऐतिहासिक फैसला दिया। इस फैसले से पूरे देश में एक बार फिर पुलिस की वर्दी शर्मसार व खून के छीटें से लाल हुई तो वहीं न्यायालयीय व्यवस्था के प्रति भी लोगों का विश्वास बढ़ा। इस से न्याय प्रक्रिया व जनवादी ताकतों की जीत हुई। सोनभद्र की अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला सिर्फ रनटोला मुठभेड़ ही नहीं बल्कि तमाम मुठभेड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वैसे भी उत्तर प्रदेश पुलिस मानवाधिका र उल्लंघन के मामले में देश में सबसे प्रथम पायदान पर है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हु ई य ह मुठभेड़ कोई पहली घटना नहीं थी। जिस ...

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही विजय विनीत आजादी के लिए मर मिटनें वालों ने सपने तो बहुत देखें होगें लेकिन उनमे दो महत्व पूर्ण थे । एक था अंग्रेजों को भगाकर स्वतंत्रता हासिल करना और दूसरा भारत से राज सत्ता का खात्मा व लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत देश में सत्ता का सञ्चालन । अकल्पनीय कष्टों व तमाम कुछ खोने के बाद देश आजाद तो हुआ लेकिन पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक व्यवस्था देश में लागू नही हो सकी है । [Image]भारत में आजादी के पूर्व ५६५ छोटी बड़ी रियासतें थीं । इनमे कुछ काफी बड़े राज घराने थे जो सदियों से कायम थे तो कुछ ऐसी भी रियासतें थी जिन्हें दिल्ली पर शासन करने वाले शासको ( अंग्रेज व मुग़ल शासकों ) ने बना दिया था । आजादी के बाद सभी रियासतों का विलय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत भारतीय गणराज्यों में हो गया । कुछ ने अगर भारतीय गणराज्य में शामिल होने से इनकार किया तो सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उन्हें मजबूर किया और सभी रियासतें टूट गयीं । [Image]26 जनवरी १९५२ से भारतीय संविधान के तहत देश का सञ्चालन शुरू हुआ । पहला लोक सभा चुनाव सन १९५२ में हुआ तो तमाम रियासतों के राजा या ...

वन कर्मियों ने दलितों की पचास से अधिक झोपड़िया की आग के हवाले

विजय विनीत चन्दौली 7 मार्च। उत्तर प्रदेश के अति नक्सल प्रभावित चन्दौली जिले के सुखदेवपुर गॉंव में रविवार दोपहर वन कर्मियों ने दलितों की पचासों झोपड़ियां फूंक दी। कुछ लोगों की वन कर्मियों ने पिटाई भी की जिससे एक व्यक्ति का सर फूट गया। तीन लोगों को वन कर्मी पकड़कर अपने साथ ले गये। इसे लेकर पूरे क्षेत्र कें दलितों में वन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी देखी जा रही है। इसी तरह की 2005 में एक कार्यवाही केे चलते नक्सलियों ने चन्दौली में विस्फोट कर तीन वन कर्मियों समेत 18 पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। जिला प्रशासन समेत चकिया विधायक ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार किया है। सुखदेवपुर के रामबृक्ष,रामअधार,मंगरू, अभिलाख,कविलास समेत कई लोगों ने बताया कि हम लोग वन क्षेत्र के भीतर कई वर्षो से आबाद हैं। हम लोगों ने कई वर्ष पूर्व अपनी झोपड़ियां लगायी थी। अगल-बगल की जमीनों पर खेती भी कर रहे थे। जबसे वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ तभी से वन विभाग के लोग आकर यहां से चले जाने की धमकी देते रहें हैं। शुक्रवार को नौगढ वन रेंज के लोग आयें और धमकी दी कि दो दिनों के अन्दर अगर यहां से झोपड़ी हटाकर चले नहीं ...

दो सौ आदिवासी परिवार घर से बेघर

विजय विनीत 25 फरवरी। सोनभद्र जिले में वनाधिकार कानून के तहत 31 सौ आदिवासी व दलित परिवार जमीने पाकर खुश हैं तो वहीं तमाम लोग वन विभाग के उत्पीड़न से दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। राबटर््सगंज तहसील क्षेत्र के पडरक्ष गांव के मगरदह टोले का नजारा देख कर किसी का भी दिल दहल सकता है। लेकिन शायद वन विभाग व पुलिस मकहमे के लोगो का दिल नही पसिजता। सात माह पूर्व मगरदह गॉव में पुलिस व वन विभाग के लोगों ने मिल कर जो ताण्डव किया उससे दो सौ आदिवासी व दलित परिवार गॉव से पलायन कर गया है। साथ ही दर्जनों गॉव वालों के ऊपर कई गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया है। गॉव के बुद्धिनारायण का कहना है कि वगैर किसी पूर्व सूचना के वन विभाग ने कई वर्षो पहले हमारी जमीन अपने नाम कर ली हम लोग उसपर जोत कोड़ करते रहे। कई बार वन महकमे के लोगों ने लाठिया बरसाई। हम दो सौ परिवार के लोग वर्ष 2004 में पडरक्ष से आकर इस टोले में आवाद हो गये जिसका जिता जागता सबूत ये पुराने मकानों कि दिवाले स्वयं है। वनाधिकार विधेयक लागू होते ही वन महकमें के लोग यहा से उजाड़ने की फिराक मे पड़ गये। 22 से 24 अगस्त के बीच तीन दिन तक लग...

जे . पी की ज्यादती

सोनभद्र १@फरवरी। जे.पी.समूह द्वारा धंधरौल बांध व सोनपम्प कैनाल का पानी हथियाने की सम्भावना पर अपना दल ने सोमवार को सदर तहसील परिसर में किसान पंचायत का अयोजन किया। जे.पी.समूह पर किसानों के हक पर कुठारा घात करने का आरोप लगाते हुए पार्टी द्वारा अनिश्चित कालीन क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गयी है। इस आन्दोलन को जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनकर कपूर, सोनभद्र विकास मंच के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर श्रीवास्तव, डाला व चुर्क के तमाम सामाजिक संगठनों नें भी अपना समर्थन देने की घोषण की है। आज से शुरू हुए इस आन्दोलन की अगुवाई अगुवाई पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने स्वयं किया। इसके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव अनुप्रिया पटेल,पूर्व मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष नजमुद्दीन, राष्ट्रीय प्रभारी गंगाराम यादव समेत हजारों किसानों व महिला मजदूरों ने जुलूस निकालकर जे.पी.समूह के विरोध में जबर्दस्त नारेबाजी की। जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने के बाद जुलूस सदर तहसील परिसर मंें सभा में तब्दील हो गया। इसमंें वक्ताओं ने जे.पी.समूह पर किसान व मजदूर विरेाधी होने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय अध्यक्षा कृ...

प्रदेश में 16 पुलिसवालों को आजीवन कारावास

विजय विनीत 04 January, 2010 19:41;00 : 76सोनभद्र, उत्तर प्रदेश। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जनपद के चर्चित रनटोला मुठभेड़ कांड को सोमवार को फर्जी करार देते हुए इसमें शामिल 14 पुलिस कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।साथ ही गोली चलाने वाले पुलिस कर्मियों पर एक-एक लाख व अन्य पर पचास-पचास हजार रूपए का अर्थदण्ड भी लगाया है।इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर से बाहर आते ही कुछ पुलिस कर्मी रो पड़े। इस फैसले की खबर लगते ही पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया। अदालत ने दो दरोगाओं को हाजिर न होने पर भगोड़ा घोषित कर दिया। दो सितंबर 2003 में हुई इस घटना के तीन साल बाद 21 फरवरी 2006 को सी0बी0सी0आई0डी0 ने पिपरी थाने में 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के दिन से ही कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता व मृतक छात्र के पिता मुठभेड़ को फर्जी करार दे रहे थे।सोनभद्र के तत्कालिन अपर जिलाधिकारी रामकृष्ण उत्तम ने मजिस्ट्रेट जांच की थी. जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट मे कुछ ऐसे तथ्य मिले जो घटना को संदिग्ध बता रहे थे. इस पर मजिस्ट्रेट उत्तम ने सीबीसीआईडी की जांच कराने की सिफार...

रनटोला के बाद एक और मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जाॅंच शुरू

मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जांच के आधार पर 14 पुलिस कर्मियों को हुआ था आजीवन कारावास विजय विनीत 8/फरवरी। रनटोला मुठभेड़ के फर्जी साबित होने के बाद एक और मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जाॅंच गुरूवार को समाप्त हुई। इसे लेकर एक बार फिर पुलिस महकमा सकते में हैै। जिस युवक को नक्सली दिखाकर पुलिस ने नौ साल पहले मार गिराया था उसके परिजन हलफनामा दाखिल कर मजिस्ट्रेट के समक्ष सारी हकीकत प्र्रस्तुत कर दिये हंै। जनपद में कार्यरत तमाम मानवाधिकार संगठनों को एक बार फिर दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद जगी है। एक माह पूर्व सोनभद्र की फास्ट ट्रैक कोर्ट नें रनटोला मुठभेड़ में चैदह पुलिस कर्मियों को उम्र कैद की सजा सुनायी। इसके बाद कई जन संगठनोें ने जनपद में हुई तमाम मुठभेड़ों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। इसे गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी सदर को जिला मजिस्ट्रेट ने 26 जुलाई 2001 को हुई एक मुठभेड़ की मजिस्ट्रेटी जाॅंच करने का जिम्मा सौंप दिया। उप जिलाधिकारी सदर ने इसमें 7 फरवरी 2010 तक किसी भी तरह का साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय नियत कर दिया। पुलिस ने 26 जुलाई 2001 को पन्नूगंज थाना क्षेत्र के ढोसरा गाॅव के जंगल...

हत्यारे निकले पत्रकार

जनादेश डाट इन/विजय ༯div> सोनभद्र। अभी सीबीआई जांच में सोनभद्र के कुछ पत्रकारों पर कोयले चोरी में संलिप्तता की कालिख साफ नहीं हो पायी थी कि फर्जी रनटोला कांड में पत्रकारों की भूमिका ने मीडिया के दामन को भी रक्तरंजित कर दिया है। देश भर से निर्दोषों के कत्ल पर पत्रकारों की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं।इण्डियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विक्रमराव ने सम्पूर्ण प्रकरण को घृणित बताते हुए दोषी व्यक्तियों की जांच की मांग की है, वहीं पीयूएचआर के सदस्य विजय विनीत ने भारत सरकार के गृह मंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजकर आवश्यक कार्यवाही की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस प्रकरण पर जनहित की तैयारी से मीडियाकर्मियों में खलबली मच गयी है।वर्ष 2003 में सोनभद्र के रनटोला के जंगलों में इनकाउन्टर के लिए ले जाये गये दो निर्दोष युवकों को गोली मारने से पहले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के सत्यनारायणा ने स्थानीय पत्रकारों को बुलवाया और इस खूनी खेल के नैतिक समर्थन में पत्रकारों से सहमति मांगी। काजू की बर्फी और काजू की नमकीन खाकर पत्रकारों ने सहमति तो दी ही, इस खे...