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अक्टूबर 11, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बौद्धिक दिवालियापन

विजय विनीत जिस देश के लेखक , पत्रकार , साहित्कार व आम जन से सरोकार रखने वाले लोगो का विचार देश काल समय के अनुसार न होकर विषयवस्तु से भटक जाय उस देश की क्या स्थिति होगी बताने की जरुरत नही । जाहिर है ऐसी स्थिति में देश दिग्भ्रमित हो जाएगा । ऐसा ही कुछ दस अक्तूबर को सोनभद्र नगर में पत्रकार नरेन्द्र मोहन की ७५वी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिला । ब्लाक सभागार में नक्सलवाद व आतंकवाद के परिप्रेक्ष में पत्रकारिता के दायित्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन था। यह विषय जिसने भी रखा वह साधुवाद का पात्र है । क्योकि जब इस विषय पर संगोष्ठी हो रही थी उसके ठीक ३६ घंटे पूर्व नक्सलियों ने गढ़चिरो़ली में १७ पुलिस कर्मियों को गोलियों से भून डाला था और ७२ घंटे पूर्व झारखण्ड में नक्सलियों ने तालिबानी आतंकवादियों की बर्बता का अनुकरण करते हुए खुफिया शाखा के एक पुलिस इंस्पेक्टर का सर कलम कर दिया था । इसके अलावा नक्सलवाद पर प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह व गृह मंत्री चिदम्बरम भी गंभीर चिंता प्रगट कर रहें थे । गंभीर विषय के साथ ही गंभीरता के साथ संगोष्ठी में तमाम पत्रकार शिक्षक अधिवक्ता, समाजसेवी व सामाजिक सरोक...