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जुलाई 9, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही

आजादी के बाद भी सत्ता की चाभी कुछ गिने चुने लोगो के हाथों संसद व विधान सभाओं में बढ़ रही वंशवाद की वेळ आजादी के लिए मर मिटनें वालों ने सपने तो बहुत देखें होगें लेकिन उनमे दो महत्व पूर्ण थे । एक था अंग्रेजों को भगाकर स्वतंत्रता हासिल करना और दूसरा भारत से राज सत्ता का खात्मा व लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत देश में सत्ता का सञ्चालन । अकल्पनीय कष्टों व तमाम कुछ खोने के बाद देश आजाद तो हुआ लेकिन पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक व्यवस्था देश में लागू नही हो सकी है । भारत में आजादी के पूर्व ५६५ छोटी बड़ी रियासतें थीं । इनमे कुछ काफी बड़े राज घराने थे जो सदियों से कायम थे तो कुछ ऐसी भी रियासतें थी जिन्हें दिल्ली पर शासन करने वाले शासको ( अंग्रेज व मुग़ल शासकों ) ने बना दिया था । आजादी के बाद सभी रियासतों का विलय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत भारतीय गणराज्यों में हो गया । कुछ ने अगर भारतीय गणराज्य में शामिल होने से इनकार किया तो सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उन्हें मजबूर किया और सभी रियासतें टूट गयीं । 26 जनवरी १९५२ से भारतीय संविधान के तहत देश का सञ्चालन शुरू हुआ । पहला लोक सभा चुनाव सन १९५२ में हुआ तो तमाम ...