विजय विनीत सोनभद्र तिलस्मी है विजयगढ़ की चन्द्रकान्ता की प्रेम कहानी तिलस्म से भरी है । विजयगढ़ दुर्ग २१ सदी के वर्तमान में भी अभी तिलस्मी बना हुआ है । भयंकर गर्मी में जब सरे तालाब , नदियाँ , नाले सुख जाते हैं तब भी १८०० फिट की उचाई पर स्थित रामसरोवर में पानी भरा रहता है। यह किसका प्रताप है । शायद यह उस पुण्यात्मा राजा महाराजा की अच्छी करनी का प्रतिफल हो जिसे हम आज तक नही समझ पायें हो । यह न सूखने वाला पानी हमें अजर , अमर , अविनाशी आत्मा का बोध करा रहा हो की पुण्य कर्म करो जिसे लोग सदियों तक भूला न पायें । विजयगढ़ के अलावा यहाँ बड़हर व अगोरी नाम की दो और रियासते थी । आजादी के बाद रियासते तो समाप्त हो गई लेकिन कुछ राजाओं के सर से इस लोकतंत्र में भी महाराजा का भुत नहीं उतरा है । वह आज भी अपने को महाराज कहलाने में ही अपनी शान समझते हैं । वह अपने महल के इर्द -गिर्द गरीबो से टेक्स वसूली करना अपना अधिकार समझते है । ऐसे ही एक महराज ...