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महाराज वसूल रहे प्याज

विजय विनीत

सोनभद्र तिलस्मी है विजयगढ़ की चन्द्रकान्ता की प्रेम कहानी तिलस्म से भरी है विजयगढ़ दुर्ग २१ सदी के वर्तमान में भी अभी तिलस्मी बना हुआ है भयंकर गर्मी में जब सरे तालाब,नदियाँ ,नाले सुख जाते हैं तब भी १८०० फिट की उचाई पर स्थित रामसरोवर में पानी भरा रहता है। यह किसका प्रताप है शायद यह उस पुण्यात्मा राजा महाराजा की अच्छी करनी का प्रतिफल हो जिसे हम आज तक नही समझ पायें हो यह सूखने वाला पानी हमें अजर , अमर ,अविनाशी आत्मा का बोध करा रहा हो की पुण्य कर्म करो जिसे लोग सदियों तक भूला पायें विजयगढ़ के अलावा यहाँ बड़हर अगोरी नाम की दो और रियासते थी आजादी के बाद रियासते तो समाप्त हो गई लेकिन कुछ राजाओं के सर से इस लोकतंत्र में भी महाराजा का भुत नहीं उतरा है वह आज भी अपने को महाराज कहलाने में ही अपनी शान समझते हैं वह अपने महल के इर्द -गिर्द गरीबो से टेक्स वसूली करना अपना अधिकार समझते है ।
ऐसे ही एक महराज का किस्सा एक जुलाई को सामने आया हालांकि उस महाराज का किस्सा हम अपने बचपन से सुनते रहें है वह आज भी पुराने दौर के कुछ रसिक मिजाज राजाओं महराजाओं से ज़रा भी भिन्न नहीं जुलाई को अपने आधा दर्जन पत्रकार साथिओं के साथ बैठा था उसी दौरान एक मैला -कुचैला कपडा पहने अधेड सामने आया उसने पूछा क्या आप लोग अखबार छापते हैं हाँ कहने पर उसने एक कागज निकाला कागज पर कोतवाल को संबोधित पत्र था पत्र में उसने अपने गाँव के बगल में रहने वाले एक महाराज का जिक्र किया था उसने लिखा था की मै अनुसूचीत जाती का व्यक्ती हूँ
मै सूअर पाल रखा हूँ लेकिन आए दिन महाराज निशाना साधने के नाम पर हमारे सूअरों को मार देते है उसे लाकर गाँव में अपने आदमीयों को बाँट देते है अंत में उसने पत्र में महाराज के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग करके लिखा था की उन्हें मना किया जाय की अब आगे से सूअरों को मारे और मारे गए सूअर का दाम दिलाये साथ बैठे लोग कभी उसे देखते थे कभी उसके पत्र को सभी अवाक थे इसलिए की ऐसा साहस पहली बार किसी ने किया सूअर मारने पर शिकायत जबकि महाराज ने इसके पहले जाने कितने कारनामें किए है और करते रहते है
उस व्यक्ती के जाने के बाद जब महाराज के हवेली के इर्द -गिर्द रहने वाले लोगो से संपर्क किया गया तो उनके कई कारनामे सामने आए लोगो के मन में बरसो से दबे आक्रोश में से थोडा बहुत आक्रोश बाहर निकला महाराज की हवेली में एक जलासय है उसमे मगर हो सकते है गाँव से गायब लोग कहाँ गए महाराज नराज होते है तो लोगो को बाँध कर पीटते है सड़क का निमार्ण कार्य रोक दिए आदि आदि लोग महाराज के बारे में बताते जा रहे थे हमारा मन बीते कल की तरफ तेजी से जा रहा था और उस राजा उसके जलाशय उसके आतंक की तस्वीर सामने घुमने लगी , जिसके जलाशय में नर कंकाल मिला था जिसको मुख्यमंत्री मायावती ने शांत किया था
इस महाराज के तमाम किस्से सुनने के बाद लोगो ने बताया की गाँव में साप्ताहिक बाजार लगती है । महाराज जी बाजार में टेक्स वसूली कराते है । एक कुंतल प्याज बेचने वाले से पाच किलो प्याज वसूली जाती है । यह जानकारी होने पर सारे लोग मुस्करा उठे और कह उठे की धन्य हो महाराज वसूल रहे प्याज ।

टिप्पणियाँ

  1. ये तो कुछ ऐसे हिस्से हैं जहां सामंत साक्षात दिखाई पड़ रहा है।
    परंतु मनों की गहराईयों में सामंती प्रवृतियां अधिकतर हिस्सों में पैठी हुई हैं।

    एक अच्छी जानकारी के साथ सुस्वागतम्...

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