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यह सम्पत्ति किसकी है विजय विनीत अति नक्सल प्रभावित नगवां विकास खंड के पूर्व प्रमुख राजेंद्र देहाती द्वारा वर्तमान प्रमुख प्रवीन सिंह पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाने के बाद प्रवीन सिंह का जो बयान आया है उससे तमाम लोग अवाक हैं । प्रमुख ने उनके आरोप पर अपना जो वक्तव्य दिया है उसके अनुसार प्रमुख के पास विहार में सवाँ १०० बीघे उपजाऊ जमीं है । उसी जमीन की उपज से अर्जित किए गए धन से वर्तमान की सारी संपत्ति हासिल की गई है । लोगो का कहना है की अगर इन्होंने पैतृक संपत्ति से सो नभद्र के मेहुणी गाँव में लाखो की३६ बीघे जमीन व भव्य हवेली बनवा रहे है तो आज से ४ साल पूर्व उनके द्वारा कही भी कोई सम्पत्ति क्यो नही अर्जित की गई क्या प्रमुख बनने के बाद उनकी उपजाऊ जमीन अचानक धन का वर्षा करने लगी । नगवां विकास खंड आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है , अगर नगवां प्रमुख ने क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई होती तो लोक सभा चुनाव में सत्ता पक्ष का कार्यकर्ता होने के बाद उनके क्षेत्र के कुरवल गावं के लोग विकास न होने की बात करते हुए चुनाव का बहिस्कार नही करते। जबकि उस गावं में सर्वाधिक संख्या अनुसूचित जाती ...

बौद्धिक दिवालियापन

विजय विनीत जिस देश के लेखक , पत्रकार , साहित्कार व आम जन से सरोकार रखने वाले लोगो का विचार देश काल समय के अनुसार न होकर विषयवस्तु से भटक जाय उस देश की क्या स्थिति होगी बताने की जरुरत नही । जाहिर है ऐसी स्थिति में देश दिग्भ्रमित हो जाएगा । ऐसा ही कुछ दस अक्तूबर को सोनभद्र नगर में पत्रकार नरेन्द्र मोहन की ७५वी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिला । ब्लाक सभागार में नक्सलवाद व आतंकवाद के परिप्रेक्ष में पत्रकारिता के दायित्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन था। यह विषय जिसने भी रखा वह साधुवाद का पात्र है । क्योकि जब इस विषय पर संगोष्ठी हो रही थी उसके ठीक ३६ घंटे पूर्व नक्सलियों ने गढ़चिरो़ली में १७ पुलिस कर्मियों को गोलियों से भून डाला था और ७२ घंटे पूर्व झारखण्ड में नक्सलियों ने तालिबानी आतंकवादियों की बर्बता का अनुकरण करते हुए खुफिया शाखा के एक पुलिस इंस्पेक्टर का सर कलम कर दिया था । इसके अलावा नक्सलवाद पर प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह व गृह मंत्री चिदम्बरम भी गंभीर चिंता प्रगट कर रहें थे । गंभीर विषय के साथ ही गंभीरता के साथ संगोष्ठी में तमाम पत्रकार शिक्षक अधिवक्ता, समाजसेवी व सामाजिक सरोक...

राजशाही से भी खतरनाक साबित होगी यह लोकशाही

आजादी के बाद भी सत्ता की चाभी कुछ गिने चुने लोगो के हाथों संसद व विधान सभाओं में बढ़ रही वंशवाद की वेळ आजादी के लिए मर मिटनें वालों ने सपने तो बहुत देखें होगें लेकिन उनमे दो महत्व पूर्ण थे । एक था अंग्रेजों को भगाकर स्वतंत्रता हासिल करना और दूसरा भारत से राज सत्ता का खात्मा व लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत देश में सत्ता का सञ्चालन । अकल्पनीय कष्टों व तमाम कुछ खोने के बाद देश आजाद तो हुआ लेकिन पूर्ण रूप से लोकतान्त्रिक व्यवस्था देश में लागू नही हो सकी है । भारत में आजादी के पूर्व ५६५ छोटी बड़ी रियासतें थीं । इनमे कुछ काफी बड़े राज घराने थे जो सदियों से कायम थे तो कुछ ऐसी भी रियासतें थी जिन्हें दिल्ली पर शासन करने वाले शासको ( अंग्रेज व मुग़ल शासकों ) ने बना दिया था । आजादी के बाद सभी रियासतों का विलय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के तहत भारतीय गणराज्यों में हो गया । कुछ ने अगर भारतीय गणराज्य में शामिल होने से इनकार किया तो सरदार बल्लभ भाई पटेल ने उन्हें मजबूर किया और सभी रियासतें टूट गयीं । 26 जनवरी १९५२ से भारतीय संविधान के तहत देश का सञ्चालन शुरू हुआ । पहला लोक सभा चुनाव सन १९५२ में हुआ तो तमाम ...

महाराज वसूल रहे प्याज

विजय विनीत सोनभद्र तिलस्मी है विजयगढ़ की चन्द्रकान्ता की प्रेम कहानी तिलस्म से भरी है । विजयगढ़ दुर्ग २१ सदी के वर्तमान में भी अभी तिलस्मी बना हुआ है । भयंकर गर्मी में जब सरे तालाब , नदियाँ , नाले सुख जाते हैं तब भी १८०० फिट की उचाई पर स्थित रामसरोवर में पानी भरा रहता है। यह किसका प्रताप है । शायद यह उस पुण्यात्मा राजा महाराजा की अच्छी करनी का प्रतिफल हो जिसे हम आज तक नही समझ पायें हो । यह न सूखने वाला पानी हमें अजर , अमर , अविनाशी आत्मा का बोध करा रहा हो की पुण्य कर्म करो जिसे लोग सदियों तक भूला न पायें । विजयगढ़ के अलावा यहाँ बड़हर व अगोरी नाम की दो और रियासते थी । आजादी के बाद रियासते तो समाप्त हो गई लेकिन कुछ राजाओं के सर से इस लोकतंत्र में भी महाराजा का भुत नहीं उतरा है । वह आज भी अपने को महाराज कहलाने में ही अपनी शान समझते हैं । वह अपने महल के इर्द -गिर्द गरीबो से टेक्स वसूली करना अपना अधिकार समझते है । ऐसे ही एक महराज ...